खस का पानी और खस की टट्टी
परंपरा: भारतीय (सनातन) · प्रमाण: क्षेत्रीय लोक-परंपरा · तरीका: धुलाई और स्प्रे
उद्देश्य: शांति और सामंजस्य, घर और कार्यस्थल, नींद
पृष्ठभूमि
उत्तर भारत की गर्मियों की घरेलू परंपरा: खस (उशीर) की जड़ों की टट्टी पर पानी डालकर ठंडी, सुगंधित हवा। चरक संहिता में उशीर शीतल गण में है।
सामग्री
- खस की सूखी जड़ें या खस की चटाई
- साफ़ पानी
विधि (क़दम-दर-क़दम)
- खस की जड़ें एक घड़े या बोतल में रात भर भिगोएँ।
- इस पानी से कमरे में हल्का छिड़काव करें, या खस की टट्टी को खिड़की पर लगाकर पानी डालें।
- टट्टी हर कुछ दिन में धूप में सुखाएँ ताकि फफूँद न लगे।
कहाँ / कब: गर्मियों में दोपहर
विकल्प: गुलाब जल का छिड़काव
⚠ सावधानी: नमी से फफूँद लग सकती है; सुखाते रहें। एलर्जी हो तो बचें।
मिलते-जुलते उपाय
पारंपरिक या प्रतीकात्मक प्रथा; कोई परिणाम गारंटीड नहीं। यह चिकित्सा, क़ानूनी या आर्थिक सलाह का विकल्प नहीं। कोई मिश्रण खाना-पीना नहीं; बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें।
The Mystic Prragati