नवग्रह समिधा हवन (जानकारी)
परंपरा: भारतीय (सनातन) · प्रमाण: ऐतिहासिक रूप से दर्ज · तरीका: धूप और राल
उद्देश्य: शांति और सामंजस्य, आध्यात्मिक शुद्धि
पृष्ठभूमि
याज्ञवल्क्य स्मृति (1.302), अग्नि पुराण (164) और गरुड़ पुराण (101) में नवग्रह हवन की समिधाएँ क्रम से हैं: आक (सूर्य), पलाश (चंद्र), खैर (मंगल), अपामार्ग (बुध), पीपल (गुरु), गूलर (शुक्र), शमी (शनि), दूब (राहु), कुश (केतु)।
सामग्री
- नवग्रह समिधा
- घी, शहद, दही (ग्रंथों के अनुसार)
- हवन कुंड
विधि (क़दम-दर-क़दम)
- यह हवन किसी जानकार पुरोहित के मार्गदर्शन में ही करें।
- हर ग्रह की समिधा उसके मंत्र के साथ अर्पित होती है।
- हवन के बाद हवादार जगह पर बैठें।
कहाँ / कब: ग्रह-शांति के समय, पुरोहित की सलाह से
विकल्प: सिर्फ़ दीपक और प्रार्थना
⚠ सावधानी: आक का दूधिया रस ज़हरीला है। घर के बंद कमरे में बड़ा हवन न करें; धुआँ दमा और बच्चों के लिए हानिकारक है।
मिलते-जुलते उपाय
आध्यात्मिक शुद्धि पोटलीव्यक्तिगत संकल्प पोटलीसामंजस्य पोटलीनींद पोटलीध्यान पोटलीशुद्धि (अनक्रॉसिंग) स्नान
पारंपरिक या प्रतीकात्मक प्रथा; कोई परिणाम गारंटीड नहीं। यह चिकित्सा, क़ानूनी या आर्थिक सलाह का विकल्प नहीं। कोई मिश्रण खाना-पीना नहीं; बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें।
The Mystic Prragati