दशहरे पर शमी पूजन
परंपरा: भारतीय (सनातन) · प्रमाण: ऐतिहासिक रूप से दर्ज · तरीका: पूजा-उपाय
उद्देश्य: करियर और व्यापार, भाग्य और अवसर
पृष्ठभूमि
विजयादशमी पर शमी वृक्ष की पूजा की परंपरा है। महाभारत (विराट पर्व) में पांडवों ने अज्ञातवास में अपने शस्त्र शमी वृक्ष पर छिपाए थे। शमी शनि की समिधा भी है।
सामग्री
- शमी का पेड़ या उसकी टहनी
- दीपक, रोली, अक्षत
विधि (क़दम-दर-क़दम)
- शाम को शमी वृक्ष के पास दीपक जलाएँ।
- रोली-अक्षत चढ़ाकर प्रणाम करें।
- कुछ क्षेत्रों में शमी की पत्तियाँ 'सोना' मानकर बाँटी जाती हैं।
कहाँ / कब: विजयादशमी (दशहरा)
विकल्प: —
⚠ सावधानी: शमी काँटेदार है; सावधानी से छुएँ।
मिलते-जुलते उपाय
पारंपरिक मोजो पोटलीशुभ भाग्य मोजो पोटलीसफलता और अवसर मोजो पोटलीरोड ओपनर (रास्ता खोलने वाली) पोटलीव्यक्तिगत संकल्प पोटलीआत्मविश्वास पोटली
पारंपरिक या प्रतीकात्मक प्रथा; कोई परिणाम गारंटीड नहीं। यह चिकित्सा, क़ानूनी या आर्थिक सलाह का विकल्प नहीं। कोई मिश्रण खाना-पीना नहीं; बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें।
The Mystic Prragati