संस्कृत सुविचार अर्थ सहित
उपनिषद, गीता, महाभारत और नीति ग्रंथों की प्रसिद्ध संस्कृत सूक्तियाँ, हिंदी अर्थ और स्रोत के साथ।
सत्यमेव जयते
सत्य की ही जीत होती है।
— मुण्डकोपनिषद्
वसुधैव कुटुम्बकम्
पूरी धरती ही एक परिवार है।
— महोपनिषद्
उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः
काम मेहनत से पूरे होते हैं, सिर्फ़ इच्छा करने से नहीं।
— हितोपदेश
विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्
विद्या विनम्रता देती है और विनम्रता से योग्यता आती है।
— हितोपदेश
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः
सब सुखी हों, सब निरोग हों।
— शांति मंत्र
अहिंसा परमो धर्मः
अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है।
— महाभारत
आचारः परमो धर्मः
अच्छा आचरण ही सबसे बड़ा धर्म है।
— मनुस्मृति
मातृदेवो भव। पितृदेवो भव। आचार्यदेवो भव।
माता, पिता और गुरु को देवता के समान मानो।
— तैत्तिरीय उपनिषद्
अतिथिदेवो भव
घर आए अतिथि को देवता के समान मानो।
— तैत्तिरीय उपनिषद्
तमसो मा ज्योतिर्गमय
हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो।
— बृहदारण्यक उपनिषद्
शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्
शरीर ही धर्म का पहला साधन है; सेहत का ध्यान रखें।
— कुमारसंभव
योगः कर्मसु कौशलम्
कर्म में कुशलता ही योग है।
— भगवद्गीता 2.50
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
तुम्हारा अधिकार कर्म पर है, उसके फल पर नहीं।
— भगवद्गीता 2.47
धर्मो रक्षति रक्षितः
जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।
— मनुस्मृति
श्रद्धावान् लभते ज्ञानम्
श्रद्धा रखने वाला ही ज्ञान पाता है।
— भगवद्गीता 4.39
उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत
उठो, जागो और श्रेष्ठ लोगों के पास जाकर ज्ञान पाओ।
— कठोपनिषद्
न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते
इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कुछ भी नहीं।
— भगवद्गीता 4.38
सत्यं वद। धर्मं चर।
सच बोलो, धर्म के रास्ते पर चलो।
— तैत्तिरीय उपनिषद्
क्षमा वीरस्य भूषणम्
क्षमा वीर का गहना है।
— संस्कृत सूक्ति
परोपकाराय सतां विभूतयः
सज्जनों की संपत्ति दूसरों की भलाई के लिए होती है।
— संस्कृत सूक्ति
सन्तोषं परमं सुखम्
संतोष ही सबसे बड़ा सुख है।
— संस्कृत सूक्ति
विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्
विद्या का धन सब धनों में श्रेष्ठ है।
— संस्कृत सूक्ति
कबीर, रहीम, तुलसीदास के दोहे · भगवद्गीता के श्लोक
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