The Mystic PrragatiThe Mystic Prragati

भगवद्गीता 18.66

अध्याय 18, श्लोक 66

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः।।18.66।।

sarva-dharmān parityajya mām ekaṁ śharaṇaṁ vraja
ahaṁ tvāṁ sarva-pāpebhyo mokṣhayiṣhyāmi mā śhuchaḥ

अर्थ: सारे धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सारे पापों से छुड़ा दूँगा; शोक मत करो।

Meaning: Giving up all dharmas, take refuge in Me alone. I shall free you from all sins; do not grieve.

प्रसंग: गीता का अंतिम उपदेश, जिसे 'चरम श्लोक' भी कहा जाता है।

जीवन से संबंध: जब सारे रास्ते बंद लगें, समर्पण और भरोसा मन का बोझ उतार देता है।

मन में रखने का विचार: आज अपना बोझ प्रार्थना में सौंपिए, और जो हाथ में है वह कीजिए।

भाव

डर / भयचिंता / घबराहटशोक

मिलते-जुलते श्लोक

2.32.112.132.142.20

अध्याय 18: मोक्षसंन्यासयोग के सभी श्लोक

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